पित्त के पाँच प्रकार : उनके विशिष्ट स्थान, विशिष्ट गुण एवं विशिष्ट कार्य
आयुर्वेद में त्रिदोषों—वात, पित्त और कफ—को शरीर के स्वास्थ्य और रोग का मूल आधार माना गया है। इनमें पित्त दोष शरीर में होने वाली सभी प्रकार की ऊष्मा, पाचन, चयापचय (Metabolism) तथा परिवर्तन संबंधी क्रियाओं का संचालन करता है। पित्त मुख्य रूप से अग्नि महाभूत का प्रतिनिधित्व करता है और शरीर में ऊर्जा उत्पन्न करने … Read more